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उत्तर प्रदेश में संवेदनशीलता या अति-संदेह? शीतला माता दर्शन को आए सगे भाई–बहन को कपल समझकर रोका,

परिवार से पुष्टि के बाद भी ‘गार्जियन’ लाने की हिदायत

उत्तर प्रदेश में संवेदनशीलता या अति-संदेह? शीतला माता दर्शन को आए सगे भाई–बहन को कपल समझकर रोका, परिवार से पुष्टि के बाद भी ‘गार्जियन’ लाने की हिदायत

उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के नाम पर की जा रही सख्ती अब सवालों के घेरे में आ गई है। ताज़ा मामला उस वक्त सामने आया जब शीतला माता के दर्शन के लिए आए एक सगे भाई–बहन को यूपी पुलिस की एक इंस्पेक्टर ने कपल होने के संदेह में रोक लिया और पूछताछ शुरू कर दी।

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने दोनों से कड़ी पूछताछ की और संदेह के आधार पर उनके परिजनों से फोन पर बात भी कराई। परिजनों द्वारा पुष्टि किए जाने और संतुष्ट होने के बावजूद, इंस्पेक्टर साहिबा ने यह कहते हुए फटकार लगाई कि “आगे से गार्जियन को साथ लेकर आया करिए।”

यहीं से यह मामला आम नागरिकों के बीच बहस का विषय बन गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब दोनों सगे भाई–बहन हैं, तो क्या भाई स्वयं गार्जियन नहीं माना जाएगा?
क्या कानून में ऐसा कोई प्रावधान है, जो किसी भाई को अपनी बहन का अभिभावक मानने से इनकार करता हो?

यह घटना पुलिस की मंशा पर नहीं, बल्कि कार्यशैली और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रही है। निस्संदेह पुलिस को संदेह होने पर पूछताछ करने का अधिकार है, लेकिन जब पहचान और पारिवारिक संबंधों की पुष्टि हो चुकी हो, तब भी इस तरह की टिप्पणी करना क्या आम नागरिकों के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाता?

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि महिला सुरक्षा के नाम पर निर्दोष लोगों को बार-बार संदेह के घेरे में लेना उचित नहीं है। इससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास की खाई और गहरी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को संवेदनशील, संतुलित और सम्मानजनक व्यवहार अपनाना चाहिए, ताकि सुरक्षा भी बनी रहे और नागरिकों की गरिमा भी सुरक्षित रहे।

अब सवाल यह है कि

  • क्या पुलिस को रिश्तों की बुनियादी समझ की जरूरत नहीं?

  • क्या हर भाई–बहन को सार्वजनिक स्थानों पर संदेह की नजर से देखा जाएगा?

  • और क्या कानून के नाम पर मानवीय समझदारी को दरकिनार किया जा सकता है?

यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि सुरक्षा और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बेहद जरूरी है।


🔥 रिपोर्ट: एलिक सिंह
✍️ संपादक: Vande Bharat Live TV News
🗞️ ब्यूरो चीफ: दैनिक आकांशा बुलेटिन, सहारनपुर
📞 संपर्क: 8217554083

🟥 सवाल वही उठाता है, जो जनता की बात करता है

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